Brahma Kumaris Murli Hindi And English 28 Nov 2019

Read Brahma Kumaris today Murli Hindi and English 28 November 2019 

Daily Gyan murli Hindi or Aaj ki murli in Hindi also Read aaj ki Murli ka sar 28 Nov 2019

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28-11-2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन

“मीठे बच्चे - शिवबाबा आया है तुम्हारे सब भण्डारे भरपूर करने, कहा भी जाता है भण्डारा भरपूर काल कंटक दूर''

प्रश्नः-ज्ञानवान बच्चों की बुद्धि में किस एक बात का निश्चय पक्का होगा?

उत्तर:- उन्हें दृढ़ निश्चय होगा कि हमारा जो पार्ट है वह कभी घिसता-मिटता नहीं। मुझ आत्मा में 84 जन्मों का अविनाशी पार्ट नूँधा हुआ है, यही बुद्धि में ज्ञान है तो ज्ञानवान है। नहीं तो सारा ज्ञान बुद्धि से उड़ जाता है।

                  ओम् शान्ति।

बाप आकर रूहानी बच्चों प्रति क्या कहते हैं? क्या सेवा करते हैं? इस समय बाप यह रूहानी पढ़ाई पढ़ाने की सेवा करते हैं। यह भी तुम जानते हो। बाप का भी पार्ट है, टीचर का भी पार्ट है और गुरू का भी पार्ट है। तीनों पार्ट अच्छे बजा रहे हैं। तुम जानते हो वह बाप भी है, सद्गति देने वाला गुरू भी है और सबके लिए है। छोटे, बड़े, बूढ़े, जवान सबके लिए एक ही है। सुप्रीम बाप, सुप्रीम टीचर है। बेहद की शिक्षा देते हैं। तुम कॉन्फ्रेन्स में भी समझा सकते हो कि हम सबकी बायोग्राफी को जानते हैं। 

परमपिता परमात्मा शिवबाबा की जीवन-कहानी को भी जानते हैं। नम्बरवार सब बुद्धि में याद होना चाहिए। सारा विराट रूप जरूर बुद्धि में रहता होगा। हम अभी ब्राह्मण बने हैं, फिर हम देवता बनेंगे फिर क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र बनेंगे। यह तो बच्चों को याद है ना। सिवाए तुम बच्चों के और किसको यह बातें याद नहीं होंगी। उत्थान और पतन का सारा राज़ बुद्धि में रहे। हम उत्थान में थे फिर पतन में आये, अब बीच में हैं। शूद्र भी नहीं हैं, पूरे ब्राह्मण भी नहीं बने हैं। अगर अभी पक्के ब्राह्मण हो तो फिर शूद्रपने की एक्ट न हो। 

ब्राह्मणों में भी फिर शूद्रपना आ जाता है। यह भी तुम जानते हो-कब से पाप शुरू किये हैं? जब से काम चिता पर चढ़े हो, तो तुम्हारी बुद्धि में सारा चक्र है। ऊपर में है परमपिता परमात्मा बाप, फिर तुम हो आत्मायें। यह बातें तुम बच्चों की बुद्धि में जरूर याद रहनी चाहिए। अभी हम ब्राह्मण हैं, देवता बन रहे हैं फिर वैश्य, शूद्र डिनायस्टी में आयेंगे। बाप आकरके हमको शूद्र से ब्राह्मण बनाते हैं फिर हम ब्राह्मण से देवता बनेंगे। ब्राह्मण बन कर्मातीत अवस्था को प्राप्त कर फिर वापिस जायेंगे। तुम बाप को भी जानते हो। बाजोली वा 84 के चक्र को भी तुम जानते हो। बाजोली से तुमको बहुत इज़ी कर समझाते हैं। तुमको बहुत हल्का बनाते हैं ताकि अपने को बिन्दी समझ और झट भागेंगे। स्टूडेन्ट क्लास में बैठे रहते हैं तो बुद्धि में स्टडी ही याद रहती है। तुमको भी यह पढ़ाई याद रहनी चाहिए। 

अभी हम संगमयुग पर हैं फिर ऐसे चक्र लगायेंगे। यह चक्र सदैव बुद्धि में फिरता रहना चाहिए। यह चक्र आदि का नॉलेज तुम ब्राह्मणों के पास ही है, न कि शूद्रों के पास। देवताओं के पास भी यह ज्ञान नहीं है। अभी तुम समझते हो भक्ति मार्ग में जो चित्र बने हैं सब डिफेक्टेड हैं। तुम्हारे पास हैं एक्यूरेट क्योंकि तुम एक्यूरेट बनते हो। अभी तुमको ज्ञान मिला है तब समझते हो भक्ति किसको कहा जाता है, ज्ञान किसको कहा जाता है? ज्ञान देने वाला बाप ज्ञान का सागर अभी मिला है। स्कूल में पढ़ते हैं एम ऑबजेक्ट का मालूम तो पड़ता है ना। भक्ति मार्ग में तो एम ऑबजेक्ट होती नहीं। यह थोड़ेही तुमको मालूम था कि हम ऊंच देवी-देवता थे फिर नीचे गिरे हैं। 

अब जब ब्राह्मण बने हो तब पता पड़ा है। ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ जरूर आगे भी बने थे। प्रजापिता ब्रह्मा का नाम तो बाला है। प्रजापिता तो मनुष्य है ना। उनके इतने ढेर बच्चे हैं जरूर एडाप्टेड होने चाहिए। कितने एडाप्टेड हैं। आत्मा के रूप में तो सब भाई-भाई हो। अभी तुम्हारी बुद्धि कितनी दूर जाती है। तुम जानते हो जैसे ऊपर में स्टॉर्स खड़े हैं। दूर से कितने छोटे दिखाई पड़ते हैं। तुम भी बहुत छोटी-सी आत्मा हो। आत्मा कभी छोटी-बड़ी नहीं होती है। हाँ, तुम्हारा मर्तबा बहुत ऊंच है। उनको भी सूर्य देवता, चन्द्रमा देवता कहते हैं। सूर्य बाप, चन्द्रमा माँ कहेंगे। बाकी आत्मायें सब हैं नक्षत्र सितारे। तो आत्मायें सब एक जैसी छोटी हैं। यहाँ आकर पार्टधारी बनती हैं। देवतायें तो तुम ही बनते हो।


हम बहुत पावरफुल बन रहे हैं। बाप को याद करने से हम सतोप्रधान देवता बन जायेंगे। नम्बरवार थोड़ा-थोड़ा फ़र्क तो रहता है। कोई आत्मा पवित्र बन सतोप्रधान देवता बन जाती है, कोई आत्मा पूरा पवित्र नहीं बनती है। ज्ञान को ज़रा भी नहीं जानती है। बाप ने समझाया है बाप का परिचय तो जरूर सबको मिलना चाहिए। पिछाड़ी में बाप को तो जानेंगे ना। विनाश के समय सभी को पता पड़ता है बाप आया हुआ है। अभी भी कोई-कोई कहते हैं भगवान जरूर कहाँ आया हुआ है परन्तु पता नहीं पड़ता। समझते कोई भी रूप में आ जायेगा। मनुष्य मत तो बहुत है ना, तुम्हारी है एक ही ईश्वरीय मत। तुम ईश्वरीय मत से क्या बनते हो? एक है मनुष्य मत, दूसरी है ईश्वरीय मत और तीसरी है देवता मत।

 देवताओं को भी मत किसने दी? बाप ने। बाप की श्रीमत है ही श्रेष्ठ बनाने वाली। श्री श्री बाप को ही कहेंगे, न कि मनुष्य को। श्री श्री ही आकर श्री बनाते हैं। देवताओं को श्रेष्ठ बनाने वाला बाप ही है, उनको श्री श्री कहेंगे। बाप कहते हैं मैं तुमको ऐसा लायक बनाता हूँ। उन लोगों ने फिर अपने पर श्री श्री का टाइटिल रख दिया है। कॉन्फ्रेन्स में भी तुम समझा सकते हो। तुम ही समझाने लिए निमित्त बने हुए हो। श्री श्री तो है ही एक शिवबाबा जो ऐसा श्री देवता बनाते हैं। वो लोग शास्त्रों आदि की पढ़ाई पढ़कर टाइटिल ले आते हैं। तुमको तो श्री श्री बाप ही श्री अर्थात् श्रेष्ठ बना रहे हैं। यह है ही तमोप्रधान भ्रष्टाचारी दुनिया। भ्रष्टाचार से जन्म लेते हैं। कहाँ बाप का टाइटिल, कहाँ यह पतित मनुष्य अपने पर रखाते हैं। 

सच्ची-सच्ची श्रेष्ठ महान आत्मायें तो देवी-देवता हैं ना। सतोप्रधान दुनिया में कोई भी तमोप्रधान मनुष्य हो न सके। रजो में रजो मनुष्य ही रहेंगे, न कि तमो-गुणी। वर्ण भी गाये जाते हैं ना। अभी तुम समझते हो, आगे तो हम कुछ नहीं समझते थे। अब बाप कितना समझदार बनाते हैं। तुम कितना धनवान बनते हो। शिवबाबा का भण्डारा भरपूर है। शिवबाबा का भण्डारा कौन-सा है? (अविनाशी ज्ञान रत्नों का) शिवबाबा का भण्डारा भरपूर काल कंटक दूर। बाप तुम बच्चों को ज्ञान रत्न देते हैं। खुद है सागर। ज्ञान रत्नों का सागर है। बच्चों की बुद्धि बेहद में जानी चाहिए। इतनी करोड़ आत्मायें सब अपने-अपने शरीर रूपी तख्त पर विराजमान हैं। यह बेहद का नाटक है। आत्मा इस तख्त पर विराजमान होती है। तख्त एक न मिले दूसरे से। सबके फीचर्स अलग-अलग हैं, इनको कहा जाता है कुदरत। हर एक का कैसा अविनाशी पार्ट है। इतनी छोटी-सी आत्मा में 84 का रिकॉर्ड भरा हुआ रहता है। अति सूक्ष्म है।

 इससे सूक्ष्म वन्डर कोई हो नहीं सकता। इतनी छोटी आत्मा में सारा पार्ट भरा हुआ है, जो यहाँ ही पार्ट बजाती है। सूक्ष्मवतन में तो कोई पार्ट बजाती नहीं है। बाप कितना अच्छी रीति समझाते हैं। बाप द्वारा तुम सब-कुछ जान जाते हो। यही नॉलेज है। ऐसे नहीं कि सबके अन्दर को जानने वाला है। यह नॉलेज जानते हैं, जो नॉलेज तुम्हारे में भी इमर्ज हो रही है। जिस नॉलेज से ही तुम इतना ऊंच पद पाते हो। यह भी समझ रहती है ना। बाप है बीजरूप। उनमें झाड़ के आदि, मध्य, अन्त की नॉलेज है। मनुष्यों ने तो लाखों वर्ष आयु दे दी है, तो ज्ञान आ न सके। अभी तुमको संगम पर यह सारा ज्ञान मिल रहा है। बाप द्वारा तुम सारे चक्र को जान जाते हो। इनके पहले तुम कुछ नहीं जानते थे। अभी तुम संगम पर हो। यह है तुम्हारा अन्त का जन्म। पुरूषार्थ करते-करते फिर तुम पूरा ब्राह्मण बन जायेंगे। अभी नहीं हो। अभी तो अच्छे-अच्छे बच्चे भी ब्राह्मण से फिर शूद्र बन जाते हैं। इसको कहा जाता है माया से हार खाना। 

बाबा की गोद से हारकर रावण की गोद में चले जाते हैं। कहाँ बाप की श्रेष्ठ बनने की गोद, कहाँ भ्रष्ट बनने की गोद। सेकण्ड में जीवनमुक्ति। सेकण्ड में पूरी दुर्दशा हो जाती है। ब्राह्मण बच्चे अच्छी रीति जानते हैं-कैसे दुर्दशा हो जाती है। आज बाप के बनते, कल फिर माया के पंजे में आकर रावण के बन जाते हैं। फिर तुम बचाने की कोशिश करते हो तो कोई-कोई बच भी जाते हैं। तुम देखते हो डूबते हैं तो बचाने की कोशिश करते रहो। कितनी खिटखिट होती है।

बाप बैठ बच्चों को समझाते हैं। यहाँ स्कूल में तुम पढ़ते हो ना। तुमको मालूम है कैसे हम यह चक्र लगाते हैं। तुम बच्चों को श्रीमत मिलती है ऐसे-ऐसे करो। भगवानुवाच तो जरूर है। उनकी श्रीमत हुई ना। मैं तुम बच्चों को अब शूद्र से देवता बनाने आया हूँ। अभी कलियुग में हैं शूद्र सम्प्रदाय। तुम जानते हो कलियुग पूरा हो रहा है। तुम संगम पर बैठे हो। यह बाप द्वारा तुमको नॉलेज मिली है। शास्त्र जो भी बनाये हैं उन सबमें है मनुष्य मत। 

ईश्वर तो शास्त्र बनाते नहीं। एक गीता के ऊपर ही कितने नाम रख दिये हैं। गांधी गीता, टैगोर गीता आदि-आदि। ढेर नाम हैं। गीता को मनुष्य इतना क्यों पढ़ते हैं? समझते तो कुछ भी नहीं। अध्याय वही उठाकर अर्थ अपना-अपना करते रहते हैं। वह तो सब मनुष्यों के बनाये हुए हो गये ना। तुम कह सकते हो मनुष्य मत की बनाई हुई गीता पढ़ने से आज यह हाल हुआ है। गीता ही पहला नम्बर का शास्त्र है ना। वह है देवी-देवता धर्म का शास्त्र। यह तुम्हारा ब्राह्मण कुल है। यह भी ब्राह्मण धर्म है ना। कितने धर्म हैं, जिस-जिस ने जो धर्म रचा है उनका वह नाम चलता है। जैनी लोग महावीर कहते हैं। 

तुम बच्चे सब महावीर-महावीरनियां हो। तुम्हारा मन्दिर में यादगार है। राजयोग है ना। नीचे योग तपस्या में बैठे हैं, ऊपर में राजाई का चित्र है। राजयोग का एक्यूरेट मन्दिर है। फिर कोई ने क्या नाम रख दिया है, कोई ने क्या। यादगार है बिल्कुल एक्यूरेट, बुद्धि से काम ले ठीक बनाया है फिर जिसने जो नाम कहा वह रख दिया है। यह मॉडल रूप में बनाया है। स्वर्ग और राजयोग संगमयुग का बनाया हुआ है। तुम आदि, मध्य, अन्त को जानते हो।

 आदि को भी तुमने देखा है। आदि संगमयुग को कहो या सतयुग को कहो। संगमयुग की सीन नीचे दिखाते हैं फिर राजाई ऊपर में दिखाई है। तो सतयुग है आदि फिर मध्य में है द्वापर। अन्त को तुम देखते ही हो। यह सब खत्म हो जाना है। पूरा यादगार बना हुआ है। देवी-देवता ही फिर वाम मार्ग में जाते हैं। द्वापर से वाम मार्ग शुरू होता है। यादगार पूरा एक्यूरेट है। यादगार में बहुत मन्दिर बनाये हैं। यहाँ ही सब निशानियाँ हैं। मन्दिर भी यहाँ ही बनते हैं। देवी-देवता भारतवासी ही राज्य करके गये हैं ना। फिर बाद में कितने मन्दिर बनाते हैं। सिक्ख लोग बहुत होंगे तो वह अपना मन्दिर बना देंगे। मिलेट्री वाले भी अपना मन्दिर बना देते हैं। भारतवासी अपने कृष्ण का वा लक्ष्मी-नारायण का मन्दिर बनायेंगे। हनूमान, गणेश का बनायेंगे।

 यह सारा सृष्टि का चक्र कैसे फिरता है, कैसे स्थापना, विनाश, पालना होती है-यह तुम ही जानते हो। इसको कहा जाता है अन्धियारी रात। ब्रह्मा का दिन और रात ही गाई जाती है क्योंकि ब्रह्मा ही चक्र में आते हैं। अभी तुम ब्राह्मण हो फिर देवता बनेंगे। मुख्य तो ब्रह्मा हुआ ना। ब्रह्मा को रखें या विष्णु को रखें! ब्रह्मा है रात का और विष्णु है दिन का। वही रात से फिर दिन में आते हैं। दिन से फिर 84 जन्मों के बाद रात में आते हैं। कितना सहज समझानी है। यह भी पूरा याद नहीं कर सकते। पूरी रीति नहीं पढ़ते हैं तो नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार पद पाते हैं। जितना याद करेंगे सतोप्रधान बनेंगे। 

सतोप्रधान सो भारत तमोप्रधान। बच्चों में कितना ज्ञान है। यह नॉलेज सिमरण करनी है। यह ज्ञान है ही नई दुनिया के लिए, जो बेहद का बाप आकर देते हैं। सब मनुष्य बेहद के बाप को याद करते हैं। अंग्रेज लोग भी कहते हैं ओ गॉड फादर लिब्रेटर, गाइड अर्थ तो तुम बच्चों की बुद्धि में है। बाप आकरके दु:ख की दुनिया आइरन एज से निकाल गोल्डन एज में ले जाते हैं। गोल्डन एज जरूर पास होकर गया है तब तो याद करते हैं ना। तुम बच्चों को अन्दर में बहुत खुशी रहनी चाहिए और दैवी कर्म भी करने चाहिए। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1)बाप से जो अविनाशी ज्ञान रत्नों का अखुट खजाना मिल रहा है-उसे स्मृति में रख बुद्धि को बेहद में ले जाना है। इस बेहद नाटक में कैसे आत्मायें अपने-अपने तख्त पर विराजमान हैं-इस कुदरत को साक्षी हो देखना है।

2)सदा बुद्धि में याद रहे कि हम संगमयुगी ब्राह्मण हैं, हमें बाप की श्रेष्ठ गोद मिली है। हम रावण की गोद में जा नहीं सकते। हमारा कर्तव्य है-डूबने वालों को भी बचाना।

वरदान:- सेवा-भाव से सेवा करते हुए आगे बढ़ने और बढ़ाने वाले निर्विघ्न सेवाधारी भव

सेवा-भाव सफलता दिलाता है, सेवा में अगर अहम् भाव आ गया तो उसको सेवा-भाव नहीं कहेंगे। किसी भी सेवा में अगर अहम्-भाव मिक्स होता है तो मेहनत भी ज्यादा, समय भी ज्यादा लगता और स्वयं की सन्तुष्टी भी नहीं होती। सेवा-भाव वाले बच्चे स्वयं भी आगे बढ़ते और दूसरों को भी आगे बढ़ाते हैं। वे सदा उड़ती कला का अनुभव करते हैं। उनका उमंग-उत्साह स्वयं को निर्विघ्न बनाता और दूसरों का कल्याण करता है।

स्लोगन:-ज्ञानी तू आत्मा वह है जो महीन और आकर्षण करने वाले धागों से भी मुक्त है।

 Om Shanti Baba...

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28/11/19 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban

Sweet children, Shiv Baba has come to make all your treasure-stores completely full. It is said: When your treasure-stores are full, all sorrow is removed.

Question:What one faith is very firm in the intellects of knowledgeable children?

Answer:

They have the firm faith that their parts will never be erased or wiped out. “I, the soul, have an imperishable part of 84 births fixed in me”. If you have this knowledge in your intellects, you are knowledgeable. Otherwise, all the knowledge disappears from your intellects.

Om Shanti

What does the Father come and say to you spiritual children? What service does He do? At this time, the Father does the service of teaching you the spiritual study. You know this. He plays the part of the Father, the part of the Teacher and also the part of the Guru. He plays all three parts very well. You know that He is the Father and also the Guru who grants salvation to everyone. He is for everyone; for the young, the mature, the old and the adolescent, there is just the One. 

He is the Supreme Father and the Supreme Teacher. He gives unlimited teachings. You can explain at the conferences that you know the biography of everyone. You also know the biography of the Supreme Father, the Supreme Soul, Shiv Baba. Your intellects remember all of this, numberwise. The whole unlimited, variety-form image must surely be in your intellects. You have now become Brahmins and you will become deities, warriors, merchants and then shudras. You children remember this, do you not? Apart from you children, no one else would remember these things. Let the whole significance of the rise and fall, remain in your intellects. 

We were in the stage of rising and then went into the falling stage and we are now in the middle. We are no longer shudras but have not yet become complete Brahmins either. If we were firm Brahmins, we wouldn't perform any shudra acts. Even Brahmins have some shudra traces. You know when you began committing sin: from the time you climbed onto the pyre of lust. You also have the whole cycle in your intellects. Up above is the Father, the Supreme Father, the Supreme Soul, and then there are you souls. You children should definitely keep these things in your intellects. We are now Brahmins and are becoming deities and we will then go into the merchant dynasty and the shudra dynasty. 

The Father comes and changes us from shudras to Brahmins and we then change from Brahmins to deities. We become Brahmins, attain our karmateet stage and then return home. You know the Father. You also know the somersault and the cycle of 84 births. Baba explains to you very easily using the example of the somersault. He makes you very light so that you can consider yourselves to be points and quickly run home. When students are sitting in class, they just have their studies in their intellects. You too should remember this study. 

We are now at the confluence age; we will then go around in this way. This cycle should constantly rotate in your intellects. Only you Brahmins have the knowledge of this cycle etc. Shudras do not have it. Even deities do not have this knowledge. You now understand that all the pictures that have been made on the path of devotion are defective. You have accurate pictures because you are becoming accurate. You have now received knowledge and this is why you understand what is referred to as devotion and what is referred to as knowledge.

 You have now found the Father, the Ocean of Knowledge, who gives you knowledge. When studying at school, you are aware of your aim and objective. On the path of devotion, there is no aim or objective. You didn't know that you were elevated deities and that you then fell down. It is now you have become Brahmins that you know this. You definitely became Brahma Kumars and Kumaris previously too. The name of Prajapita Brahma is glorified. Prajapita is a human being. He has so many children, and so they must surely be adopted. So many are adopted. As souls, all are brothers. Your intellects now go so far. 

You know that just as there are stars up above, and they appear to be so small from a distance, so, you too are very tiny souls. A soul never becomes larger or smaller. Yes, your status is very high. They call them the sun deity and the moon deity. The Sun is said to be the Father and the moon is said to be the mother and all the other souls are stars of the sky. So, all souls are tiny and the same. Souls come here and become actors. Only you become deities. We are becoming very powerful. By remembering the Father, we will become satopradhan deities. There is a little difference, numberwise. Some souls become pure and become satopradhan deities, whereas other souls don’t become completely pure. They don’t have any knowledge at all. 

The Father has explained: Everyone definitely has to receive the Father's introduction. At the end, they will know the Father. At the time of destruction, everyone will realise that the Father has come. Even now, some people say: “God has definitely come somewhere”, but they can't tell where. They think that He could come in any form. There are many human dictates. Yours are only one - God’s directions. What are you becoming by following God’s directions? One are human dictates and next are God’s directions and third are the directions from the deities. 

Who gave directions to the deities? The Father. It is the Father's shrimat that makes you elevated. Only the Father, and not human beings, is called Shri Shri. Shri Shri comes and makes you shri (elevated). It is only the Father who makes elevated deities. He is called Shri Shri. The Father says: I make you so worthy. Those people have then given themselves the title Shri Shri. You can explain at conferences. Only you have become the instruments to explain to them. Only the one Shiv Baba is Shri Shri who is making us into shri deities. Those people study the scriptures or other studies and receive a title.

 The Father who is Shri Shri is Himself making you shri, which means elevated. This is the tamopradhan, corrupt world. People take birth through corruption. There is such a great difference between the Father's title and that title which those impure human beings give themselves. Truly elevated and great souls are deities. In the satopradhan world, there cannot be any tamopradhan human beings. In the rajo stage, there would only be human beings with the rajo stage, not tamoguni human beings. The clans are also remembered. You now understand this, but, previously, you didn't understand anything. The Father is now making you so sensible. You are becoming so wealthy. 

Shiv Baba's treasure-store is completely full. What is Shiv Baba's treasure-store? (That of the imperishable jewels of knowledge.) Shiv Baba's treasure store is completely full and all sorrow is removed. The Father is giving you children the jewels of knowledge. He Himself is the Ocean. He is the Ocean of the jewels of knowledge. The intellects of you children should go into the unlimited. All of those billions of souls are seated on the thrones of their bodies. This is an unlimited play. Souls are seated on those thrones. No two thrones are the same; each one's features are different. This is called the wonder of nature. 

Each one has an imperishable part. Such tiny souls have parts of 84 births recorded within them. They are extremely subtle. There cannot be any wonder more subtle than this. Such tiny souls are filled with whole parts and those parts are played here. No part is played in the subtle region. The Father explains to you so well. You come to know everything from the Father. This is knowledge. It isn't that He is the One who knows what is inside each one. He knows this knowledge and this knowledge is now emerging in you too; and, it is through this knowledge that you claim such a high status! You have this understanding, do you not? The Father is the Seed. He has the knowledge of the beginning, middle and end of the tree. Human beings have given it a duration of hundreds of thousands of years, and so they cannot have any knowledge. You are receiving all of this knowledge now at the confluence age. 

You have now come to know the whole cycle from the Father. Before this, you didn't know anything. You are now at the confluence age and this is your final birth. By making effort, you will eventually become complete Brahmins. You are not that now. Now from Brahmins, even very good children become shudras once again. This is called being defeated by Maya. You become defeated in Baba's lap and go into Ravan's lap. There is such a difference between the Father's lap in which you become elevated and the other lap in which you become corrupt. You receive liberation-in-life in a second and you reach a stage of complete degradation in a second. Brahmin children know very well how there is degradation.

 Today, you belong to the Father, and tomorrow, you are caught in the claws of Maya and belong to Ravan. Then, when you try to save them, some of them are saved. When you see that someone is drowning, you continue to try and save him. There is so much conflict. The Father sits here and explains to you children. You are studying here in school, are you not? You know how you go around this cycle. You children receive shrimat: Do this and this. There are definitely the versions of God. These are His elevated directions: 

I have now come to make you children into deities from shudras. Now, in the iron age, there is the shudra community. You know that the iron age is coming to an end and that you are sitting at the confluence age. You have received this knowledge from the Father. All the scriptures that have been created have human dictates in them. God does not write any scriptures. They have given so many names to just the one Gita: the Gandhi Gita, the Tagore Gita etc. There are so many names. Why do people study the Gita so much? They don't understand anything at all. They just take up a few chapters and extract their own meanings from them. All of that is created by human beings. You can tell them: By your studying the Gita written by human beings, this has become the condition of today.

 The Gita is the number one scripture. This is the scripture of the deity religion. This is your Brahmin clan. This is also the Brahmin religion, is it not? There are so many religions. Whoever creates a religion, his name continues. The Jains speak of Mahavir. All of you children are mahavirs. Your memorial is in the Dilwala Temple. There is Raj Yoga, is there not? Down below, you are sitting in tapasya or yoga and, up on the ceiling, there are the pictures of the kingdom. That is an accurate temple of Raj Yoga. Then, some gave it one name and others gave it another name. 

The memorial is absolutely accurate. They have used their intellects and made it very well. Then, whatever name someone gave, they kept that name. That is a model that they have created. Heaven and Raj Yoga are created at the confluence age. You know the beginning, middle and end. You have also seen the beginning. You can call either the confluence age or the golden age the beginning. The scene of the confluence age is shown down below and the kingdom is shown up above. So, the golden age is the beginning and the copper age is the middle period. You are now seeing the end. All of this is to end. An accurate memorial has been created. The deities themselves go onto the path of sin. The path of sin begins with the copper age. The memorial is very accurate. They have created many temples as memorials. All the signs are here. Temples are created here too. 

The deities, the residents of Bharat, ruled and went away. Then, later, they built so many temples. When there are many Sikhs, they build their own temple. Those of the military also build their own temple. The people of Bharat build temples to Krishna, Lakshmi and Narayan, Hanuman and Ganesh. Look how the world cycle turns! How establishment, destruction and sustenance take place! Only you know this. This is called the dark night. The day and night of Brahma are remembered because it is Brahma who goes around the cycle.

 You are now Brahmins and will then become deities. The main one is Brahma. Should it be Brahma's name or Vishnu's name? Brahma exists in the night and Vishnu exists in the day. That same one goes from the night into the day. Then, from the day, after 84 births, he goes into the night. The explanation is so easy. Even that cannot be remembered fully. If you don't study well, the status you claim is numberwise, according to your efforts. The more remembrance you have, the more satopradhan you will become. Satopradhan Bharat then becomes tamopradhan. You children have so much knowledge: you have to churn this knowledge. 

This knowledge is for the new world. The unlimited Father comes and gives it to you. All human beings remember the unlimited Father. English people say: O God, the Father, Liberator, Guide! You children have the meaning of these words in your intellects. The Father comes and removes you from the iron age, the world of sorrow, and takes you to the golden age. The golden age definitely passed, which is why they remember it. You children should have a lot of happiness inside you. You should also perform divine acts. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for Dharna:
1. Keep in your awareness the infinite treasures of the imperishable jewels of knowledge that you receive from the Father and take your intellect into the unlimited. See as a detached observer the wonder of nature and how souls are seated on their own thrones in this unlimited play.

2. Your intellect should always remember that we are confluence-aged Brahmins. We have received the elevated lap of the Father. We cannot go into Ravan's lap. Our duty is to save those who are drowning.

Blessing:

May you be an obstacle-free server who moves forward and enables others to move forward by doing service with the consciousness of serving.

The consciousness of serving brings you success. If there is any arrogant consciousness in your doing service, then that would not be said to be the consciousness of serving. If there is any arrogance mixed in service it then takes a lot of effort and a lot of time and you won’t have any contentment in yourself. The children who have the consciousness of serving move forward and also enable others to move forward. They constantly experience the flying stage. Their zeal and enthusiasm makes them free from obstacles and it also benefits others.

Slogan:
Knowledgeable souls are those who are also free from fine and attractive threads.

Om Shanti Baba......





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